मैं एक भारतीय होने के नाते बचपन से आप लोगों की ही तरह घर का खाना खाते आ रहा था जैसा कि भारतीय खाने में होता है दाल, रोटी, सब्जी चावल इत्यादि लेकिन अगर आप इनका पोषण जानकारी पढ़ेंगे तो आप पाएंगे इन सभी फूड्स में 62 प्रतिशत तक पूरे कार्ब्स हो सकते है और इनमें प्रोटीन बहुत कम मात्रा में है जिसकी क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं ऐसा जरूरी नहीं है ऐसा मैं नहीं कह रहा आप इनका DIAAS और PDCAAS स्कोर चेक कर सकते है।
लेकिन मुझे हैरानी तब हुई जब मैने ICMR की 2025 की एक रिपोर्ट पढ़ी जिसमें यह बताया गया कि भारतीय खाने का लगभग 62 प्रतिशत तक कार्ब्स से आ सकता है जिसके बाद से मैने अपने डाइट को बदलने का सोचा और हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से लो कार्ब्स डाइट अपनाया और उसके बाद मुझे कई सारे बदलाव अपने शरीर में महसूस हुआ जो कि व्यक्तिगत रूप से काफी चीजों पर निर्भर हो सकता है जिसे की मै अपने अनुभव और वैज्ञानिक रिसर्च आधार पर बताऊंगा।
हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से लो कार्ब्स डाइट क्यों अपनाया?
हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से लो कार्ब्स डाइट को अपनाने से पहले मैने ICMR की 2024 की एक और रिपोर्ट पढ़ी जिसमे उन्होंने बताया कि भारत में 70 प्रतिशत से अधिक लोग प्रोटीन इंटेक अपना पूरा नहीं कर पा रहे है।
जिसके बाद से मैने अपने खाने के प्लेट पर नजर डाला, जहां पर मुझे पता चला कि हमारे प्लेट में कार्ब्स भर भर के मौजूद हो सकता है फैट प्रोटीन और विटामिन्स मिनरल्स तो है ही नहीं, एवं मैं एक डेस्क जॉब एवं Sedentary लाइफस्टाइल वाला आदमी हूं इसी वजह से मैने हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से लो कार्ब्स डाइट अपनाया।
लो कार्ब्स डाइट से कौन कौन से फायदे मिले?
लो कार्ब्स से मेरा मतलब कार्बोहाइड्रेट को अपने खाने से बिल्कुल ही कम कर देना नहीं है बल्कि मेरे दैनिक एक्टिविटी के हिसाब से उसे संतुलित रखना, और बैलेंस डाइट लेने लगा ऐसा इसलिए क्योंकि मैं जो खाना खाता था उसमें पहले से ही कार्ब्स भर भर के मौजूद हो सकते थे, जिस वजह से मैने अपने भोज में कार्ब्स को संतुलित कर दिया और जिसके बाद से मैने अपने शरीर ने कुछ बदलाव महसूस किया हालांकि ऐसे अनुभव कुछ व्यक्तियों द्वारा report किए गए हैं, लेकिन हर व्यक्ति में समान परिणाम हों यह आवश्यक नहीं है –
एनर्जी स्तर
कुछ लोग जब अपने कार्बोहाइड्रेट intake को activity level के अनुसार संतुलित करते हैं, तो वे अपने ऊर्जा स्तर में बदलाव महसूस कर सकते हैं। नीचे बताया गया अनुभव व्यक्तिगत अवलोकन है, जिसे वैज्ञानिक शोध के संदर्भ में समझना चाहिए, मै अधिक प्रोसेस कार्ब्स से भरे भोजन (सफेद चावल) करने की वजह से खाना खाने के बाद दिनभर सुस्त रहता था लेकिन जब मैने कार्ब्स को बैलेंस किया और प्रोटीन वसा और बाकी चीजें include किया तब मेरे शरीर दिमाग में दिनभर एनर्जी बने रहने लगा और सुस्ती काफी हद तक कम हो गया।
शोध यह संकेत देते हैं कि sedentary lifestyle वाले व्यक्तियों में high-carbohydrate meals के बाद blood glucose response अलग हो सकता है। हालांकि, यह प्रभाव व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करता है। Journal of Clinical Psychiatry में पब्लिश हुई Psychobiological Effects of Carbohydrates नामक एक पुरानी स्टडी यही बताती है कि अधिक कार्ब्स बिना प्रोटीन और फैट के meal खाने से नींद या सुस्ती आ सकती है।
क्रेविंग कम हुआ
मैने यह खुद के ऊपर पाया कि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना से बैलेंस खाना खाने पर मेरा क्रेविंग कम हो गया, जो।की जरूरी नहीं ही है किसी के साथ हो क्योंकि मैने रिफाइंड कार्ब्स की जगह कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और प्रोटीन अपने खाने में अच्छी मात्रा में शामिल कर लिया जो कि हो सकता है मुझे बार बार किसी तरह का खाने का क्रेविंग कम करने में मदद कर रहा हो।
Physiology & Behavior नामक जनरल में Effect of short- and long-term protein consumption on appetite and appetite-regulating gastrointestinal hormones, a systematic review and meta-analysis of randomized controlled trials (2020) में प्रकाशित यह मेटा एनालिसिस यही बताती है कि कुछ लोगों में प्रोटीन ज्यादा देर तक पेट को भरा हुआ रख सकते है एवं क्रेविंग को कम कर सकता है।
बॉडी फैट
हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से जब मैने एक बैलेंस लो कार्ब डाइट शुरू किया तब मैने अगले कुछ महीनों के बाद कुछ लोगों में balanced low-to-moderate carb diet अपनाने के दौरान body composition में धीरे-धीरे बदलाव देखे जा सकते हैं, खासकर जब हल्की physical activity भी शामिल हो।
इतना मेजर तो नहीं लेकिन सामान्य तौर पर जिसे मैं साफ साफ देख सकता था साथ में मेरे बॉडी में मसल हल्का फुल्का सा बढ़ता हुआ देख रहा था क्योंकि मैं Pushup Pullup करता था जिसकी वजह कुछ और भी हो सकता था हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट से लो कार्ब्स बैलेंस डाइट में बदलने के बाद, जो कि जरूरी नहीं है हर किसी में हो।
नींद
जैसा कि मैने ऊपर बताया कि हाई कार्ब्स से बैलेंस डाइट लेना शुरू किया तब एनर्जी का स्तर संतुलित होने में मदद मिली एवं सुस्ती पभी संतुलन हुआ, जिससे मैं दिनभर अच्छे तरीके से काम कर पा रहा था एवं शारीरिक गतिविधि भी काफी अच्छी हो गया था, इससे मैने एक और चीज गौर किया कि रात में मेरे स्लिप की गुणवत्ता काफी अच्छा हो गई रात में नींद काफी अच्छे आने लगा।
बेड पे लेटने के कुछ समय बाद अपने आप ही नींद आ जाता है मै इसकी वजह डाइट के साथ बाकी चीजों जैसे कुलमिलाकर हेल्थी लाइफस्टाइल को भी मान सकता हूं।
स्किन
जब हाई कार्ब्स इंडियन डाइट से मैने लो मीडियम कार्ब्स बैलेंस डाइट अपनाया तो मैने अपने स्किन में बदलाव पाया। मेरे स्किन की क्वालिटी काफी अच्छी हो गई थी एवं जो हल्के फुल्के Acne हो रहे थे उसमें धीरे धीरे सुधार दिख रहा था, यह बदलाव बैलेंस डाइट लेने के कुछ महीनों बाद मुझे धीरे धीरे महसूस होने लगा था लेकिन जरूरी नहीं है इसकी वजह हाई प्रोटीन डाइट ही हो और हर किसी व्यक्ति में भी यह बदलाव हो यह भी जरूरी नहीं है।
कुछ स्टडी का भी जिक्र है जैसे Journal of the American Academy of Dermatology International नामक जनरल में 2022 में प्रकाशित Diet and Acne नमक सिस्टेमैटिक रिव्यू यह बताती है कि high glycemic index वाले कार्बोहाइड्रेट फूड्स को अधिक।मात्रा में लेने से स्किन में Acne बढ़ा सकता है। यही मेरे केस में हो सकता है पहले मैं ज्यादातर High GI फूड सफेद चावल काफी मात्रा में खाता था जो ज्यादातर भारतीय की डाइट का प्रमुख हिस्सा होता है।
Disclaimer – इस वेबसाइट पर दी गई स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आहार, व्यायाम, दवा या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले कृपया योग्य डॉक्टर या हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह अवश्य लें।
गजेन्द्र महिलांगे एक Health & Wellness Blogger हैं। उन्होंने BA की पढ़ाई कर रहे है और पिछले 3 वर्षों से स्वास्थ्य, फिटनेस और पोषण से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अपने अनुभव आधारित कंटेंट लिख रहे हैं।
वे PubMed, WHO, NIH, NIN जैसे भरोसेमंद वैज्ञानिक स्रोतों से जानकारी लेकर उसे अपने व्यक्तिगत अनुभव के साथ सरल और समझने योग्य भाषा में पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका लक्ष्य है कि पाठकों को सही, वैज्ञानिक और उच्च-गुणवत्ता की जानकारी मिले, ताकि वे अपने स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर फैसले ले सकें।
डिस्क्लेमर – गजेन्द्र महिलांगे कोई डॉक्टर नहीं हैं, यह एक Nutrition Blogger हैं।