हमारा शरीर कैसा होगा इसमे हमारे डाइट अर्थात खाने पीने का काफी बड़ा योगदान होता है यह हमारे जीवन को काफी बड़े रूप मे प्रभावित कर सकता है इसी तरह से हर एक देश का अपना एक अलग अलग डाइट अर्थात खाना पीना होता है हर एक देश मे अलग अलग तरह के चीजों को अलग अलग तरह से पकाकर खाया पिया जाता है भारत मे भी काफी सारी अलग अलग चीजे है खाने पीने की जिन्हे अलग अलग तरह से पकाकर खाया जाता है इस लेख मे हम इंडियन डाइट और यूरोपीयन डाइट दोनों को समझेंगे रिसर्च स्टडी आदि के आधार पर।
क्योंकि इन दिनों अलग अलग प्रकार की डाइट को लेकर पूरी दुनिया मे चर्चा बनी रहती है ऐसे मे की सारे लोगों को यह लगता है वे जो खाना खा रहे है वह बेस्ट है और पोषक तत्वों से भरपूर है ऐसे मे इंडियन डाइट और यूरोपियन डाइट को समझने से हमें यह अंदाजा लग सकता है की लोग किस किस तरह के खाना खाते है।
इंडियन डाइट और यूरोपीयन डाइट में से कौन सा बेस्ट है?
इंडियन डाइट और यूरोपियन डाइट दोनों ही डाइट एक दूसरे से बिल्कुल अलग हो सकते है लेकिन दोनों का मकसद एक ही है व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा मे सभी तरह के पोषक तत्व प्रदान करना और व्यक्ति को स्वस्थ रखना, दोनों मे ही खाने की अनेक चीजे उपलब्ध है दोनों ही अलग अलग वातावरण के हिसाब से हो सकते है, ऐसा इसलिए क्योकि यूरोपीयन डाइट सामान्यतः अपने ठंडे वातावरण के लिए जानी जाती है भारत मे ठंडी और गर्मी दोनों ही मौसम होते है तो हो सकता है की यहाँ का डाइट इसी के हिसाब से हो।
रिसर्च के आधार पर एक एक कर के यह जानते है की दोनों डाइट मे कौन से कमिया और कौन से अच्छी चीजे है –
भारतीय डाइट (Indian Diet)
भारतीय खाना अधिकतर वेज यानि बिना माँस के होता है हालांकि भारतीय आहार मे भी माँस शामिल हो सकता है लेकीन बहुत ही कम और कुछ ही व्यंजनों मे, जिसे भारतीयों के लिए दैनिक स्तर पर अपनी डाइट मे करना मुश्किल हो सकता है इसीलिए भारतीय डाइट का ज्यादातर हिस्सा बिना माँस के होता है लेकिन हाँ भारतीय डाइट मे डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, घी, पनीर जैसी चीजे शामिल होती है लेकिन यह भी एक सीमित मात्रा मे यही वजह है की ICMR (इंडियन कॉन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के स्टडी के मुताबिक भारतीय डाइट मे 62 प्रतिशत सिर्फ कार्बस् शामिल है।
फूड्स विकल्प
भारतीय खाने मे फूड्स के अलग अलग विकल्प मौजूद है चावल, गेहू, अलग अलग तरह के अनाज, सभी तरह के दाले मूंग, मसूर, उरद, अरहर, चना इत्यादि, सभी तरह की सब्जिया, सभी तरह के फल घी, सरसों का तेल, नारियल तेल जैसे बेहतरीन तेल, बादाम, अखरोट, काजू किसमिस इत्यादि जैसे मेवे एवं डेयरी उत्पाद दूध, पनीर, दही, मक्खन ये सभी पोषक तत्वों के भरपूर साधन हो सकतेहै।
फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स के भरपूर साधन
लहसुन, प्याज, हल्दी, अदरक, धनिया जैसे भारतीय मसाले एवं मौसमी सब्जिया सभी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स मे भरपूर माने जाते है अलग अलग रिसर्चे के मुताबिक, ICMR और NIN के 2020 के डाइटरी गाइडलाइन के मुताबिक अगर भारतीय डाइट मे पारंपरिक अनाज, दाले और फल सब्जिया पर्याप्त मात्रा मे शामिल हो तो या दैनिक स्तर पर 25 से 40 ग्राम तक का डाइटरी फाइबर प्रदान कर सकता है जो की WHO के द्वारा बताई गई 25 से 30G प्रति दिन के करीब हो सकता है।
प्रोटीन के साधन
भारतीय खाने मे प्रोटीन के लिए अलग अलग पौधे आधारित साधन हो सकते है जैसे सभी तरह की दाले, डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर वही पर सोयाबीन चने मूंग इत्यादि भी प्रोटीन से भरपूर होता है अधिकतर पौधे आधारित प्रोटीन Single Source में पुरे नही होते है लेकिन एक उचित Combination से जरुरत पूरी हो सकती है और सोयाबीन और डेयरी उत्पाद इनमे खरे उतरते है।
साथ मे अंडे, चिकन, माँस भी भारत मे खाया जाता है जो की प्रोटीन के उत्कृष्ट साधन है लेकिन भारत मे इसे एक सीमित मात्रा मे खाया जाता है।
मौसमी फूड्स
भारत मे सभी तरह के मौसम होते है इसी वजह से यहाँ पर मौसम के हिसाब से अलग अलग फूड्स के विकल्प मौजूद होता है, सब्जियों से लेकर फलों तक मे जो मौसमी फूड्स मौसम के हिसाब से मे काफी आसान हो सकता है और साथ मे पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है।
कमियां
- भारतीय डाइट मे प्रोटीन कम होता है और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है Indian Council of Medical Research (ICMR) और National Institute of Nutrition (NIN) 2020 के रिपोर्ट के मुताबिक कई भारतीय अपना प्रोटीन इतेक पूरा नही कर पा रहे है।
- भारतीय खाने मे तेल या घी का इस्तेमाल काफी अधिक मात्रा मे होता है जो की सेहत के लिए ठीक नहीं होता है इसे आप ही देख सकते है पूड़ी, सब्जिया इत्यादि बनाने के लिए कितना तेल का इस्तेमाल हो सकता है।
- भारतीय डाइट मे चीनी, नमक, मसाले जैसी चीजों का अधिक इस्तेमाल हो सकता है।
यूरोपीयन डाइट (European Diet)
यूरोपीयन देश अक्सर सबसे ठंडी जगहों मे से एक होता है यहाँ पर अक्सर साल के अधिकतर समय ठंड होता है ऐसे मे यहाँ का डाइट इसी के हिसाब से हो सकता है यहाँ पर माँस काफी अधिक मात्रा मे खाया जाता है Mediterranean diet में Fish और Plant फूडस Dominant होते है, यूरोपियन डाइट मे Mediterranean diet अर्थात भूमध्यसागरीय आहार को सबसे हेल्थी माना जा सकता है।
फूड्स विकल्प
यूरोपीयन डाइट मे भी खाने के काफी सारे विकल्प मौजूद है यहाँ पर अलग अलग तरह का माँस, सभी तरह के डेयरी उत्पाद, अंडे, Avocado, कीवी, केले जैसे बेहतरीन फल और अलग अलग तरह सब्जिया और जैतुन का तेल शामिल होते है, नट्स, भूरे चावल क्विनोआ, साबुत गेहूं जैसे अनाज शामिल होते है।
प्रोटीन की गुणवत्ता
यूरोपीयन आहार मे माँस का उपयोग काफी अधिक मात्रा मे किया जाता है यहाँ तक की इस डाइट के अधिकतर मील मे माँस मौजूद होता है साथ मे कुछ डेयरी उत्पादों भी शामिल होते है माँस शरीर के लिए एक उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन प्रदान करता है इस प्रोटीन मे शरीर के लिए आवश्यक सभी 9 अमीनो ऐसिड होते है एवं यह प्रोटीन शरीर मे काफी अच्छे से शरीर मे अवशोषित होता है।
हेल्थी फैटस
हेल्थी फैटस यूरोपियन आहार मे काफी अच्छी मात्रा मे होते है एवं इंडियन डाइट हेल्थी फैटस नट्स के अलावा घी जैसे अलग फूड्स से आते है लेकिन वही पर यूरोपियन डाइट मे फूड्स साधन जैसे Avocado, आलिव ऑइल, नट्स इत्यादि से आते है जो की हेल्थी फैटस के बेहतरीन साधनो मे से एक है।
रिसर्च आधारित
यूरोपियन के मेडिटेरेनियन डाइट पर काफी सारी रिसर्च आज तक हो चुकी हो सकती है और यह स्टडी बताते है की यूरोप के मेडिटेरेनियन डाइट को काफी हेल्थी हो सकता है यहाँ तक British Medical Journal में प्रकाशित Modified Mediterranean diet and survival: EPIC-elderly prospective cohort study नामक स्टडी जो 1992 से 2003 के बीच बुजुर्गों पर किया गया था 9 यूरोपियन देशों मे, इसमे पाया गया की कुछ मॉडिफाइड मेडिटेरेनियन डाइट फॉलो करने वालों लंबी उम्र पाई गई।
कमिया
- मेडिटेरेनियन डाइट या यूरोपियन डाइट मे शाकाहारी भोजन काफी सीमित है इसमे शाकाहारियों के विकल्प काफी कम मिलते है।
- इस डाइट मे माँस का काफी अधिक सेवन किया जाता है जिसमे संतुलन न किया जाए तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है।
- यह भारत के आधार पर देखे तो भारतीयों के लिए काफी अधिक महंगा हो सकता है।
- कई सारी रिसर्च बताती है रेड मीट के अधिक सेवन से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है जिसे सीमित करना आवश्यक हो सकता है।
निष्कर्ष
यूरोपियन डाइट मे मेडिटेरेनियन डाइट काफी अच्छा हो सकता है यह काफी सारी रिसर्च से गुजर चुका है और अधिकतर इसे हेल्थी बताते है लेकिन वहीं पर इंडियन डाइट भी काफी हेल्थी हो सकता है बस इसमे मौजूद कमियों को सुधार करे जैसे सिर्फ कार्बस को अधिक मात्रा मे शामिल न करके प्रोटीन और फैटस एवं एवं हरी सब्जिया सलाद इत्यादि पर्याप्त मात्रा मे शामिल करके इसे संतुलन करना आवश्यक है जिससे की इंडियन डाइट भी हेल्थी हो सकता है।
Disclaimer – इस वेबसाइट पर दी गई स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आहार, व्यायाम, दवा या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले कृपया योग्य डॉक्टर या हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह अवश्य लें।
गजेन्द्र महिलांगे एक Health & Wellness Blogger हैं। उन्होंने BA की पढ़ाई कर रहे है और पिछले 3 वर्षों से स्वास्थ्य, फिटनेस और पोषण से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अपने अनुभव आधारित कंटेंट लिख रहे हैं।
वे PubMed, WHO, NIH, NIN जैसे भरोसेमंद वैज्ञानिक स्रोतों से जानकारी लेकर उसे अपने व्यक्तिगत अनुभव के साथ सरल और समझने योग्य भाषा में पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका लक्ष्य है कि पाठकों को सही, वैज्ञानिक और उच्च-गुणवत्ता की जानकारी मिले, ताकि वे अपने स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर फैसले ले सकें।
डिस्क्लेमर – गजेन्द्र महिलांगे कोई डॉक्टर नहीं हैं, यह एक Nutrition Blogger हैं।