अक्सर हेल्थ फिटनेस एक्सपर्ट को आपने कहते हुए सुना होगा की अच्छी सेहत के लिए 8 से 9 घंटे की नींद जरूरी हो सकता है इससे शरीर के हार्मोन संतुलित रहते है एवं शरीर को अपने आप मे अच्छे से रिपेयर होने का समय मिल पाता है लेकिन आजकल के आधुनिक रिसर्च एवं यह Brain Sciences (ISSN 2076-3425) नामक जर्नल में प्रकाशित Timing of Deep and REM Sleep Based on Fitbit Sleep Staging in Young Healthy Adults under Real-Life Conditions (2024) अध्ययन यह कहती है स्लीप के घंटों से ज्यादा मायने स्लीप की गुणवत्ता, टाइमिंग। स्लीप साइकिल इत्यादि ज्यादा मायने रख सकती है।
दरअसल और इसे ही स्मार्ट स्लीप कहा जा सकता है एक तरह की ऐसी नींद जो दिमाग, शरीर, हार्मोन्स और मेटाबॉलिज़्म को बैलेंस करने मे मदद करे और स्वस्थ रखने मे मदद करता है आज के भागदौड़ की जिंदगी मे स्मार्ट स्लीप अपने शरीर को पर्याप्त मात्रा मे आराम देने का एक तरीका हो सकता है जिसके आधार हम यह जानकारी आपको प्रदान करने वाले है।
Smart Sleeping क्या है?
स्मार्ट स्लीप को अगर हम एक सरल भाषा मे समझे तो स्मार्ट तरीके से अपने स्लीप को आप्टीमाइज़ करना ही स्मार्ट स्लीप कहा जा सकता है जिससे की नींद की गुणवत्ता मे सुधार हो सके यानि कम समय मे भी एक बेहतर नींद प्राप्त कर सके आधुनिक रिसर्च इसे ही स्मार्ट स्लीप कह सकते है। सही टाइम और रोजाना फिक्स समय पर सोना Circadian Rhythm (नींद की सबसे बेहतर अवस्था) के अनुसार, लंबी नींद के बजाय नींद की गुणवत्ता पर ध्यान देना, सोने के बाद और सोने से पहले की आदतों को बेहतर नींद के लिए उन्हे आप्टीमाइज़ करना इत्यादि का मतलब ही स्मार्ट स्लीप कह सकते है अर्थात सिर्फ सोना (नींद लेना) नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से सोना।
Circadian Rhythm अपनाना
Annals of Clinical Biochemistry में प्रकाशित Human circadian rhythms: physiological and therapeutic relevance of light and melatonin (2006) कीये गए रिसर्च के इस रिव्यू के मुताबिक मानव शरीर मे Circadian Rhythm अर्थात एक तरह से जैव घड़ी, हमारे सोने जागने दिन रात की बायोलॉजिकल टाइमिंग मे हार्मोन, प्रकाश मेलाटोनिन की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है Circadian Rhythm ही तय करता है की कब स्लीप हार्मोन रुकेगा और बढ़ेगा, कब बॉडी रिपेयर सबसे बेहतरीन होती है अलग अलग रिसर्च मे यह पाया गया है की रात के 10 PM से लेकर 2 PM तक सबसे गहरी नींद हो सकती है इससे कुछ समय पहले सोने से हमारी नींद की गुणवत्ता मे काफी सुधार हो सकता है एवं इस दौरान 2 से 3 गुणा तेजी से शरीर भी रिकवर हो सकती है।
इसी वजह से स्मार्ट स्लीप के तहत सबसे पहले 10PM के आस पास के समय मे सोना।
स्लीप साइकिल को समझना
नींद प्रत्येक 90 मिनट के साइकिल मे चल सकती है जैसे पहले 90min (लाइट स्लीप) उसके बाद 90 मिनट (डीप स्लीप) उसके बाद (REM दिमागी का रिकवर होने का समय इसी समय आ सकते है) यह मैं नहीं कहता कई सारी रिसर्च यही कहती है।
डीप स्लीप का नियम
डीप स्लीप अच्छी नींद के लिए बेहद जरूरी है अलग अलग रिसर्च यह बताते है की इससे रिकवरी बढ़िया हो सकती है एवं शरीर का टेस्टोस्टेरॉन स्तर बढ़िया हो सकती है और डीप स्लीप के लिए हम एक जरूरी नियम अपना सकते है स्लीप फाउंडेशन के अनुसार सोने से पहले ब्लू लाइट जैसे स्मार्टफोन, कंप्युटर इत्यादि से निकलने वाली रोशनी के संपर्क मे आने से शरीर मे मेलाटोनिन (नींद वाला हार्मोन) का स्तर कम हो सकता है जिससे नींद आने मे देरी हो सकती है इसी वजह से सोने से कुछ घंटों पहले ही ब्लू लाइट एवं स्मार्टफोन, कंप्युटर इत्यादि से दूरी बना ले।
सुबह धूप सेकना
Journal of Sleep Research जर्नल में प्रकाशित Shine light on sleep: Morning bright light improves nocturnal sleep and next morning alertness among college students (2022-23) नामक स्टडी जो की कॉलेज स्टूडेंट्स के ऊपर कीया गया उसमे यह पता चला की घर से बाहर आने वाली बाहर की रोशनी जैसे सूरज की रोशनी मे रहने से कुछ लोगों में स्लीप की गुणवत्ता मे सुधार हो सकता है इससे मेलटोनिन हार्मोन भी बेहतर ढंग से कार्य करता है इसीलिए स्मार्ट स्लीप का अगला नियम यह है की सुबह के समय 20 से 30 मिनट सूरज की रोशनी मे बिताना, यह स्लीप को बेहतर कर सकता है।
सोने से पहले का रूटीन
ऐसे काफी सारे हेल्थ एक्स्पर्ट यह मानते है की सोने से पहले एक निश्चित रूटीन सेट करना बेहतर नींद मे मदद कर सकता है और नींद की गुणवत्ता मे सुधार कर सकता है किताबे पढ़ना, स्ट्रेचिंग करना, मेडिटेशन करना ये सभी चीजे सोने मे लगने वाले समय को कम करता है जिससे की नींद जल्दी आ जाती है साथ मे सोने से पहले रूम के लाइट को बंद करना भी शामिल है ये सभी चीजे नींद की गुणवत्ता मे सुधार कर सकती है।
स्मार्ट स्लीप नेचुरल स्लीप रूटीन
आधुनिक समय मे नींद न आना काफी लोगों के लिए समस्या है एवं की हेल्थ एक्स्पर्ट 7 से 8 घंटे सोने की सलाह देते है ऐसे मे स्मार्ट स्लीप आधुनिक समय मे कुछ तरीकों को अपनाकर अपने नींद को ऑप्टिमाइज़ करने मे मदद करता है यह एक तरह से नींद के रूटीन को थोड़ा नेचुरल भी बनाता है क्योंकि आधुनिक जीवन मे आधुनिक चीजे नींद को काफी अधिक प्रभावित कर रही है एवं स्मार्ट स्लीप नींद की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है जिससे की ग्रोथ हार्मोन संतुलित होता है, टेस्टोस्टेरॉन का स्तर बढ़ सकता है, शरीर की रिकवरी और एनर्जी भी अच्छी हो सकती है इत्यादि।
एक तरह से स्मार्ट स्लीप 7 से 8 घंटे की नींद के बजाय नींद की गुणवत्ता पर अधिक फोकस करता है की लोग 7 से 8 घंटे की नींद लेते है लेकिन बीच बीच मे नींद खुल जाना, नींद जल्दी न आना, नींद खुलने के बाद जल्दी नींद न आना जैसी समस्या का सामना करते है स्मार्ट स्लीपिंग इन्ही समस्या को कम करने मे मदद कर सकता है।
Disclaimer – इस वेबसाइट पर दी गई स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आहार, व्यायाम, दवा या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले कृपया योग्य डॉक्टर या हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह अवश्य लें।
गजेन्द्र महिलांगे एक Health & Wellness Blogger हैं। उन्होंने BA की पढ़ाई कर रहे है और पिछले 3 वर्षों से स्वास्थ्य, फिटनेस और पोषण से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अपने अनुभव आधारित कंटेंट लिख रहे हैं।
वे PubMed, WHO, NIH, NIN जैसे भरोसेमंद वैज्ञानिक स्रोतों से जानकारी लेकर उसे अपने व्यक्तिगत अनुभव के साथ सरल और समझने योग्य भाषा में पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका लक्ष्य है कि पाठकों को सही, वैज्ञानिक और उच्च-गुणवत्ता की जानकारी मिले, ताकि वे अपने स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर फैसले ले सकें।
डिस्क्लेमर – गजेन्द्र महिलांगे कोई डॉक्टर नहीं हैं, यह एक Nutrition Blogger हैं।